जमुई : नक्सलियों के भय से एक साथ कमाने भी नहीं जा सकते ग्रामीण

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जमुई: भय ,भूख के बाद अब मिल रही धमकी वापस लौट जाओ वरना होगा हमला -प्रशासन से खानापूर्ति के सिवा कुछ न मिला ….जमुई लगभग देढ़ माह से भय और भूख से जंग लड़ रहे अपने परिवार और बच्चों की सुरक्षा के लिए जद्दोजहद कर रहे वनवासी को अब नक्सलियों द्वारा धमकी भरा मैसेज भी मिलने लगा है ….पीड़ित ग्रामीण बताते है अब तो हमलोगों का हाल पीछे खाई आगे गड्ढा में फंसने जैसा हो गया पूरे 300 से उपर लोगों का जत्था अपना खेवनहार खोज रहा है कोरा आस्वाशन के सिवा कुछ ठोस इंतजाम नहीं हो पाया नक्सली भय से गांव से पलायन कर चुके ग्रामीणों का…… भय और भूख से पीड़ित ग्रामीणों का कहना है सरकार और जिला प्रशासन से लगातार गुहार लगाते लगाते थक गए है अब तो धमकी भी मिल रही है शुरूआती दिनों में प्रशासन ने कुछ दिनों तक राशन का इंतजाम किया था अब तो हाथ खड़े कर दिए है ……हमलोग खुद मेहनत मजदूरी कर अपने और अपने परिवार का पेट पालने में सक्षम है केवल सरकार हमारे सुरक्षित पुनर्वास की व्यवस्था करे

नाकालियो के भय से एक साथ कमाने भी नहीं जा सकते आधा कमाने जाता है तो आधा बाकी बचे महिला और बच्चों के पहरे में रहता है जो राशन कमा कर लाते मिल बांटकर सभी एक टाइम खा पाते है ….लेकिन कब तक चलेगा ये सब जिसके भय से गांव छोड़ा था आज वापस गांव लौटने की वही धमकी दे रहा है एक स्कूल से दुसरे स्कूल में में हमलोगों को उठाकर डाल दिया गया यहां भी हम और हमारा परिवार सुरक्षित नहीं है ….

बड़े बड़े भाषण देने वाले जनप्रतिनिधि समाजसेवी आज तक कोई भी हमारा दर्द जानने नहीं आया मिलने पर गुहार लगाने पर कोरे आस्वाशन के सिवा कुछ न मिला

धमकी के बाद रतजगा कर अपने परिवार की पहरेदारी कर रहे है

 

यहां बताते चले कि 14 जुलाई को कुमरतरी गांव के मां और दो बेटे की नक्सलियो द्वारा हत्या करने के बाद 15 जुलाई को कुमरतरी और गुरमाहा के ग्रामीण गांव छोड़कर पलायन कर गए थे

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